84 योग आसनों के नाम चित्र सहित | लाभ, प्रकार और सही उपयोग की पूरी जानकारी

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हम योग का अभ्यास अपनी शक्ति को बढ़ाने, बुध्दि को तेज करने और शरीर का संतुलन बनाये रखने के लिए करते है। अगर यह जानना मुश्किल हो की योग कितने प्रकार का होता है और कैसे किया जाता है तो हमारे लिए इसको करना मुश्किल हो जाता है। आज के इस लेख में हम 84 योग आसनों के नाम चित्र सहित विस्तार में पड़ेगे और जानेगे की योग कैसे  करते है।

84 योग आसनों के नाम चित्र सहित | लाभ, प्रकार और सही उपयोग की पूरी जानकारी

प्राचीन परम्पराओ के आधार पर योग करने से मन शांत, पवित्र, स्वस्थ और अच्छा रहता है। फिर चाहे आपको अभी शुरुआत करना हो या आप अपनी नॉलेज के लिए पड़ रहे हो। जब हम Yoga की Images को देखते है तो इसे करने की जिज्ञासा होती है। और हम योगा करना और उसका पालन करना शुरू कर देते है। और इसे कुछ महीना, साल करने के केाद शरीर की चमक बड़ जाती है। तो चलिए जानते है की yogasan क्या होता है।

Yogasan क्या होता है।

योगासन (Yogasan) एक शारीरिक मुद्रा या आसन हैं जिनका अभ्यास शरीर में शक्ति, लचीलापन, संतुलन और विश्राम को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। प्रत्येक आसन शरीर के Important अंग, जैसे मांसपेशियों, जोड़ों और ऊर्जा चैनल ( जैसे नाड़ी, प्राण, अवरोध, चक्र ) पर कार्य करने के लिए बनाया गया है।

योग आप खड़े होकर, जमीन में बैठकर या balance बना कर कर सकते है। हर एक Yoga आसान अपने प्रभावों के लिए जाना जाता है। ईशा सद्गुरु फाउंडेशन के अनुसार परम्परागत रूप से 84 Yogasan को Importance दी गयी है। और हम यही 84 योग आसनों के नाम चित्र सहित समझेंगे।

योगासन होता कितने प्रकार है।

योगासन के प्रकारों की अभी कोई निश्चित संख्या नहीं है, लेकिन शास्त्रीय रूप से 84 योगासन माने जाते है। योगासन को मुद्रा और उसके उद्देय के हिसाब से भी विभजित कर सकते है। वैसे मुद्राये 5 प्रकार की होती है। जैसे (हस्त, मन, काया, बंध और आधार) योग को ये 5 मुद्राओ के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। यह शरीर के हिस्सों में ऊर्जा का काम करती है।

84 योग आसनों के नाम चित्र सहित देखे।

यह 84 योग आसनों के नाम चित्र सहित प्राचीन योग ग्रंथो के मूल आधार है। हलाकि इन सभी को रोजाना नहीं किया जा सकता है। फिर भी इनको प्रतिदिन करने से शरीर स्वस्थ रहता है।

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सबसे पहले बात करेंगे बैठने के आसन की जिसकी 1-20 मुद्राये होती है।

84 योग आसनों के नाम चित्र सहित | लाभ, प्रकार और सही उपयोग की पूरी जानकारी
84 असानो में से एक सिद्धासन

1. सिद्ध मुद्रा (Siddha Mudra) या सिद्धासन

सिद्ध मुद्रा (Siddha Mudra) यानि सिद्धासन ध्यान करने के लिए एक शक्तिशाली और स्थिर आसन है, इसका अर्थ होता है पूर्ण या ज्ञानी मुद्रा। जिसमें एक पैर की एड़ी को मूलाधार (Perineum) पर और दूसरी एड़ी को जननांग के ऊपर रखकर, दोनों टखनों को एक-दूसरे के ऊपर टिकाया और पालथी मरकर किया जाता है। इसे करने से रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है और यह आंतरिक ऊर्जा को बड़ा देता है, मन शांत होता है और एकाग्रता, सोचने की क्षमता बढ़ती है।

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सिद्ध मुद्रा कैसे करना है।

  • शुरुआत में फर्श पर पालथी मारकर बैठ जाये और दोनों पैरों को सामने फैलाएं. और फिर बाये पैर को घुटने से मोड़ें और तलवे को दाईं जांघ के अंदरूनी हिस्से पर रखें.
  • अब दाएं पैर को घुटने से मोड़ें और इस पैर की एड़ी को बाएं पैर की जांघ और पिंडली के बीच की जगह में फंसाएं, ताकि एड़ी मूलाधार (Perineum) पर आ टिके.
  • बाएं टखने को दाएं टखने के ऊपर रखें ताकि दोनों टखने एक-दूसरे को छूते रहें।
  • अब दोनों हाथों को घुटनों पर रखें और अंगूठे व तर्जनी को मिलाकर ज्ञान मुद्रा या चिन मुद्रा बनाएं।
  • रीढ़ और सिर को सीधा रखते हुए छाती को खुला रखें, सामान्य और गहरी सांस लेते रहें, मन को शांत और स्थिर रखें और इस अवस्था में 5–10 मिनट या जितना सहज हो उतनी देर बैठें।

महिलाये इसे सिद्ध योनि आसन कहती है और शुरू में आप इसे धीरे धीरे शुरू कर सकते है। और इसका निरंतर अभ्यास Energy source बन सकता है।

कमल मुद्रा | लाभ, प्रकार और सही उपयोग की पूरी जानकारी
कमल मुद्रा (Lotus Position)

2. पद्मासन (Lotus position)

कमल मुद्रा (Lotus Position) को करने के लिए अपने दोनों पैर विपरीत जांघों के ऊपर, अधिक लचीलेपन के साथ रखकर किया जाता है। यह लगभग सिद्धासन के जैसा देखने में लगता है पर सिद्धासन और पद्मासन में केवल एक अंतर है की पद्मासन में दोनों पैर विपरीत जांघों पर होते है जबकि सिद्धासन में एक एड़ी पेरिनियम (मूत्राशय के नीचे) पर और दूसरी उसके ऊपर रखी जाती है।

जब हम पद्मासना का अभ्यास लम्बे समय तक करते है तो हम अपने अंदर शारीरिक, मानसिक, और आध्यत्मिक शक्ति का अनुभव करते है। जिससे हमारे मन को स्थिरता और शांति मिलती है। और हममे सोचने की क्षमता बढ़ जाती है।

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पद्मासन कैसे करना है।

इस आसन को करने के लिए, फर्श पर सीधी रीढ़ के साथ बैठकर, दोनों पैरों के घुटनों को मोड़ते हुए एक-एक करके विपरीत जांघों पर इस तरह रखें कि एड़ियाँ पेट के पास और तलवे ऊपर की ओर रहें। फिर दोनों हथेलियों को ऊपर की ओर (ज्ञान मुद्रा में) घुटनों पर रखकर, सिर और रीढ़ को सीधा रखते हुए गहरी सांसें लें और ध्यान केंद्रित करें।

तितली या कृपालु मुद्रा | लाभ, प्रकार और सही उपयोग की पूरी जानकारी
भद्रासन यानि तितली या कृपालु मुद्रा

3. भद्रासन (Bhadrasna)

भद्रासन (Gracious pose) जिसको सभी तितली या कृपालु मुद्रा (Kraplu mudra) के नाम से भी जानते है। इसको करना बड़ा आसान होता है। अपने दोनों पैरो के तलवो को जोड़कर, Private part से लगाकर घुटनो को जमीन की ओर झुकाते है और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते है। कृपालु मुद्रा को लम्बे समय तक किया जा सकता है।

इसको करने से हमारा मूलाधार चक्र Active होता है। जिससे पेट और घुटनो के दर्द में आराम मिलती है।

भद्रासन को कैसे करना है।

इस आसन को करने के लिए, एक मैट पर बैठकर पैरों के तलवों को एक साथ मिलाएं और उन्हें शरीर के पास (ऊपर-निचे) लाएं। रीढ़ को सीधा रखते हुए, हाथों से पैर पकड़ें। और घुटनों को आराम से नीचे झुकने दें और यदि ज़रूरत हो तो उनके नीचे तकिया रख लें। इसके साथ ही, Pelvis के निचले भाग को हल्का खींचकर मूल बंध का Contraction करें।

मुक्ति मुद्रा
मुक्ति मुद्रा

4. मुक्तासन (मुक्ति मुद्रा)

इस आसन को करना लगभग सिद्धासन के सामान है। इसको एकाग्रता बढ़ाने और गहन विश्राम की स्थित को लाने के लिए किया जाता है। यह कुंडलिनी ऊर्जा व मूलाधार चक्र से आज्ञा चक्र तक ले जाता है। जिससे मन शांत और मुक्ति मार्ग खुल जाता है।

इसका अर्थ स्वतंत्रता या मोक्ष भी है इसलिए इसे मुक्ति मुद्रा कहा जाता है। इसको आप पवन विमोचन मुद्रा से relate  कर सकते है।

मुक्तासन को कैसे करना है।

फर्श पर पीठ के बल लेटकर अपने घुटनो और एड़ि को पेरिनियम (जांघो के बीच ) के पास तक ले जाये। अपने हाथो को free कर दे और एक हाथ दूसरे हाथ के ऊपर रखें। और गहरी सांस ले।

यह तनाव चिंता को दूर कर एकाग्रता को बढ़ाता है। खासकर पेट के अंगो को nutrition देता है और हमारा पाचन सुधर सकता है।

वज्रासन
वज्रासन

5. वज्रासन (वज्र मुद्रा)

स्वामी रामदेव अपने आसनो में से वज्रासन को बड़ी गहनता से करते है। इस आसन को करना बड़ा ही सरल और उत्तम है इसमें एड़ियों के बल बैठकर रीढ़ सीधी रखते है। यह पाचन को सुधारने और मन को शांत करने के लिए लाभप्रद है।

वज्रासन को कैसे करना है।

  • जमीन में घुटनो के बल बैठे। पैर की बड़ी ऊगली को साथ मिलाये और एड़िया अलग अलग रखें।
  • नितम्ब (Breech) को पैरो पर इस तरह टिकाये की पैर के तलवे नितम्ब के बहरी हिस्से को छू रहे हो।
  • हाथो को घुटनो पर रखें पीठ सीधी हो रीढ़ की हड्डी को ज्यादा पीछे न मोड़े।
  • अब आखों को बंद कर ले इसको कितनी भी देर किया जा सकता है।

6. वीरासन

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