Home हेल्थकेयर Apollo Clinic Bill Shock: Light Fever के इलाज पर ₹9,900 खर्च, मरीज हुआ हैरान

Apollo Clinic Bill Shock: Light Fever के इलाज पर ₹9,900 खर्च, मरीज हुआ हैरान

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चेन्नई के एक आदमी की पोस्ट करने पर एक डॉक्टर ने जवाब दिया जो अपोलो हॉस्पिटल में काम करता है। मैं मामूली बुखार के लिए डॉक्टर से सलाह नहीं लेता। हाँ, डॉक्टर सुधीर ने कहा, मैं एंटीबायोटिक नहीं लेता और जाँच भी नहीं करवाता। यहाँ तक पैरासिटामोल भी नहीं, मैंने लाखों रुपये बचाए होंगे।
Apollo Clinic Bill Shock: Light Fever

Apollo Clinic Bill Shock: चेन्नई के एक व्यक्ति ने दावा किया कि अपोलो क्लिनिक में सामान्य बुखार के इलाज और जांच के लिए उससे ₹9,900 लिए गए। इस घटना ने भारत में महंगी जांच, मरीजों की पसंद और निजी अस्पतालों के खर्च को लेकर बहस छेड़ दी है।

Quick Summary

मामला क्या है चेन्नई के एक व्यक्ति ने Apollo Clinic में हल्के बुखार के इलाज के लिए ₹9,900 का बिल शेयर किया
बीमारी हल्का बुखार (Light Fever)
कुल खर्च लगभग ₹9,000 – ₹9,900
शामिल जांच Blood Test, Swab Test
दवाइयों का खर्च लगभग ₹900
घटना कहां वायरल हुई X (Twitter) पर पोस्ट के जरिए
डॉक्टर का जवाब कुछ डॉक्टरों ने कहा कि हल्के बुखार में टेस्ट जरूरी नहीं होते
लोगों की राय कई यूज़र्स ने इसे मरीज का व्यक्तिगत फैसला बताया
मुख्य सवाल क्या मामूली बुखार के लिए इतने महंगे अस्पताल जाना जरूरी था?
बड़ी बहस सरकारी vs प्राइवेट अस्पताल

Apollo Clinic Bill Shock: डॉक्टर ने कहा

प्रशांत रंगस्वामी (@itisprashanth) ने X पर अपना मेडिकल बिल शेयर किया, जिस पर डॉक्टरों और आम लोगों दोनों ने प्रतिक्रिया दी। एक सीनियर डॉक्टर (अपोलो नेटवर्क से जुड़े) ने भी इस पर जवाब दिया।

उन्होंने बताया कि हल्का बुखार होने पर वे सलाह लेने के लिए Apollo Clinic गए थे।

उन्होंने लिखा,

“सिर्फ हल्का बुखार था। चेकअप के लिए Apollo Clinic गया। कुल बिल ₹9,000 आ गया। जिसमें Blood test, swab test और ₹900 की दवाइयाँ शामिल थीं। मुझे लगा यह बिल्कुल भी सही नहीं था।”

हालांकि उन्होंने बुखार की वजह या डॉक्टर की सलाह के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। उनकी यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई। कुछ लोगों ने इन टेस्ट की जरूरत पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने कहा कि यह मरीज का खुद का फैसला था।

Man stressed over medical bill

Apollo Hospitals के डॉक्टर का जवाब

हैदराबाद के apollo hopital के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार का जवाब काफी वायरल हुआ। उन्होंने कहा कि मामूली बुखार के लिए वे डॉक्टर के पास नहीं जाते, न ही टेस्ट करवाते हैं, और दवा भी नहीं लेते। उनका कहना है कि ऐसा करके उन्होंने सालों में काफी पैसे बचाए हैं।

Users का रिएक्शन

कई लोगों ने कहा कि यह पूरी तरह मरीज का अपना फैसला था। अस्पताल किसी को जबरदस्ती टेस्ट या इलाज के लिए मजबूर नहीं करता।

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एक user ने तो लिखा:

“हल्का बुखार है तो आराम करें, पैरासिटामोल लें और घर का खाना खाएं। अगर ठीक न हो तो पास के डॉक्टर को दिखाएं, जिसमें ज्यादा से ज्यादा ₹1000-1200 लगते हैं। आपने छोटी समस्या को बड़ा बना दिया।”

लोगों ने क्या सवाल उठाए

कुछ लोगों ने पूछा कि मामूली बुखार के लिए इतने बड़े प्राइवेट अस्पताल जाने की जरूरत क्या थी?

एक user ने कहा:

“क्या अस्पताल ने आपको टेस्ट कराने के लिए मजबूर किया था? आप पास के फैमिली डॉक्टर के पास भी जा सकते थे।”

तो दूसरे user ने मज़ाक में कहा:

“अगर पता था कि सिर्फ हल्का बुखार है, तो अपोलो क्यों गए?”

सरकारी vs प्राइवेट अस्पताल की बहस

इस मामले ने फिर से एक पुरानी बहस को सामने ला दिया। एक user ने लिखा:

“सरकारी अस्पतालों में अच्छे डॉक्टर होते हैं, लेकिन सुविधाएं कम होती हैं। प्राइवेट अस्पतालों में सुविधाएं अच्छी होती हैं, लेकिन कई बार पैसे ज्यादा लिए जाते हैं। और आम आदमी को छोटी बीमारी में भी हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।”

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