भारत की दिग्गज बॉक्सर एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom) हाल ही में खेल से ज्यादा अपनी निजी जिंदगी से जुड़े विवादों को लेकर सुर्खियों में आ रही हैं। इस Mary Kom Mental Health Controversy ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। की क्या
हम खिलाड़ियों की Mental Health को गंभीरता से लेते हैं?
मैरी कॉम विवाद: पूरा मामला
Aap ki Adalat में पॉडकास्ट होने के बाद, और कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तलाक के बाद मैरी कॉम और उनके पूर्व पति Onler Kom के बीच आर्थिक और व्यक्तिगत आरोप और प्रत्यारोप देखने को मिल रहे है।
लेकिन यह सभी लिखी गई जानकारियाँ केवल मीडिया रिपोर्ट्स, इंटरव्यू और सार्वजनिक बयानों के आधार पर हैं। और यह बयान किसी न्यायालय द्वारा सिद्ध नहीं किया गया है यह केवल आरोप और जवाबी आरोप हैं। वर्तमान समय तक इस मामले में कोई भी कानूनी फैसला या न्यायिक निर्णय सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया गया है। इसलिए, किसी भी पक्ष के आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए।
मीडिया ट्रायल और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
जब किसी खिलाड़ी की निजी जिंदगी सार्वजनिक बहस बन जाती है, तो उसका सीधा असर Mental health पर पड़ता है। लगातार चलने वाले विवाद और मीडिया की निगरानी किसी भी व्यक्ति की मानसिक सेहत को प्रभावित कर सकती है। बार-बार की आलोचना से व्यक्ति को चिंता और उदासी महसूस होने लगती है। फिर लंबे समय तक तनाव रहने पर मानसिक थकान हो जाती है और मन किसी भी काम में नहीं लगता।
ऐसे हालात में कई लोगों को तो नींद की समस्या होने लगती है, जैसे देर से नींद आना या बार-बार नींद का टूटना। ऐसे में खुद को बचाने के लिए व्यक्ति लोगों से दूरी बनाने लगता है। साथ ही समाज में अपनी छवि खराब होने का डर बना रहता है, जिससे आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है।
Why Women Athletes Face More Pressure
महिला खिलाड़ियों को अक्सर आदर्श रोल मॉडल की छवि में बाँध दिया जाता है। उनके खेल से ज़्यादा उनके निजी फैसलों पर ध्यान दिया जाता है। छोटी-छोटी बातों पर भी उन्हें ज्यादा जज किया जाता है और पुरुष खिलाड़ियों की तुलना में कड़ी आलोचना सहनी पड़ती है। कई बार उनकी खेल उपलब्धियाँ पीछे छूट जाती हैं और उनकी निजी ज़िंदगी ही चर्चा का आगे आ जाती है।
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स की राय
जब कोई व्यक्ति एक बार पब्लिक शेमिंग का शिकार हो जाता है। तब पब्लिक शेमिंग और सोशल मीडिया ट्रेंड्स सबसे मज़बूत इंसान को भी साइकोलॉजिकली नुकसान पहुंचा सकते हैं।
ऐसे समय में व्यक्ति को चाहिए।
- प्रोफेशनल काउंसलिंग
- इमोशनल सपोर्ट
- डिजिटल डिटॉक्स
मेडिकवादा का पर्सपेक्टिव (Medicovada Perspective)
मेडिकवाड़ा का मानना है की mental Health पब्लिक के जजमेंट से ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है। आरोप तो सभी लगा सकते है लेकिन एम्पथी की जगह कोई नहीं ले सकता है। जितने भी athletes है सभी को psychological support की जरुरत, न की social punishment की। मेन्टल हेल्थ को प्राथमिकता देना समाज की भी जिम्मेदारी होनी चाहिए।
Conclusion
Mary Kom Mental Health Controversy हमें याद दिलाती है कि हर मेडल के पीछे एक इंसान होता है, जिसमें इमोशंस, स्ट्रगल और कमज़ोरियां होती हैं। तो आइए, सिर्फ़ कॉन्ट्रोवर्सीज़ के बारे में ही नहीं, बल्कि Mental Health Awareness के बारे में भी बात करें।
Disclaimer: यह लेख केवल मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को ध्यान में रखकर लिखा गया है। Medicovada किसी भी व्यक्तिगत आरोप की पुष्टि नहीं करता।